बातें के लिए पुरालेख

ये दिन

Posted in Uncategorized with tags on फ़रवरी 20, 2012 by paawas

सलेटी सा मैला आकाश धूप की मैल ओढ़ रहा है …
हर रोज इंतज़ार रहता है नीले गहरे आकाश का … मार्च आने को है और फरवरी के दिन सरक नहीं रहे हैं …
दूर क्षितिज के पास मौसम लाइन बना खड़े हैं … किसका इंतज़ार है उन्हें …
फरवरी के ये दिन किसी भी मौसम के नहीं होते … एक उकताहट और उनींदापन … अलसाए बदरंग दिन और उचटती नींद वाली थकाऊ रातें …
कुछ होते होते रह जाता हो जैसे … जैसे बहुत दिनों से चला पत्र रास्तों में खो गया हो … किसी दूसरे का दरवाज़ा खटखटा रहा हो …
मार्च के दिन संवरे संवरे होंगे … गर्द बुलाते से जाड़े हारे हुए से जा रहे होंगे और कुछ गर्म गर्म सा उभरने लगेगा हवाओं में … हल्का  सिकता सा वक्त … ओवन से निकले किसी हाट क्रास बन जैसा …
मार्च यानी दिन जैसे दस बजने को हों … जैसे कोई दूकान के शटर खोल रहा हो … जैसेचाय वाले ने पहली चाय का पानी चढ़ा दिया हो … जैसे उम्मीदों भरे इंतज़ार शुरू हो रहे हों … जैसे भूरे उदास मन ने आँखें खोल ली हों …
जैसे एक बेवजह सी उम्मीद हाथ पकड़ ले …
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