पाखी


पाखी ..पाखी … ओ हमारे  पाखी

आपने कहा कुछ लिखेंगी …

हमने सब किताबें … नोट्स … और मन को भी हटा दिया है हर जगह से …

हमने शुक्र गृह से कह दिया है … हमें न बुलाये … हम नहीं आने वाले …

पलकों पे तैरते सपने , उनकी समीक्षाएँ उनकी सदाएं और उनके अर्थ , उन्के रंग … सब हटा किनारे रख दिया है …

आप लिखिए … हम आप को देख रहे हैं … आपको देखते रहेंगे …

अगर लिखे में साँसों की आवश्यकता हो तो हमारी साँसें हाज़िर हैं …

अगर उदासियों के कत्थई रंग चाहेंगी  … तो  हम दे देंगे ..

हमारे पास सलेटी रंग का हल्का , गहरा , भारी भारी सा अकेलापन भी है …

हमने तितलियों को भेजा है …थोडा सा अनुराग इकठ्ठा करने …

बिजली चमक लाएगी और बादल… बौछारें ….

और आप को पता है … चाँद तारे सब इंतज़ार कर रहे हैं … हाल खचाखच भरा है …

हमारा पाखी आज कुछ कहेगा .. पाखी को प्यार

हम

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