मई, 2011 के लिए पुरालेख

तुम से बातें करूं तुम्हारी

Posted in Uncategorized on मई 31, 2011 by paawas

आ गए हों तुम बहारे जैसे फिर से आ गयीं ,
वादियों में पीले पीले फूल इतराने लगे

आओ मैं देखूं तुम्हें, देखूं तुम्हें कुछ इस तरह .
 धीरे धीरे से हवाएं मुस्कुरा बहने लगें

घेरा बातों ने तेरी कुछ इस तरह से इन दिनों ,
बुत बने सड़कों किनारे, तन्हा से डूबे रहे

कैसी गुम सुम सी पड़ीं हैं मेरी बातें तुम कहो ,
उठ के बैठें धोएं मुंह को लौट के मैं आ गया

मेरी बातें , मेरे किस्से , मेरी तन्हाई सुनो ,
इनके भीतर ही छुपा हूँ , शक्ल खोकर मैं कहीं

Advertisements

सुनो

Posted in Uncategorized on मई 25, 2011 by paawas

मैं हथेली रख के ओंठों पर तुम्हारे अनकही बातों को छूना चाहता हूँ

पीली मैल …

Posted in Uncategorized on मई 15, 2011 by paawas

नये कपड़े पुराने हों गए हैं
ड्राई क्लीन होने नहीं जाते अब
बाई पीट पीट कर धोती है

पीलाते से जाते हैं रंग उनके

मैल छुप सी जाती है
आँख मूंदे बाई उन्हें खंगालती है और बेदर्दी से निचोड़
तार पर फैला देती है

धूप में सड़ते रहते हैं सारी दोपहर वो पुराने कपडे
रात के अंधेरों में डरते से रहते है न पुराने कपडे

कोई चीखता है तो उन्हें उतारती है बाई
धोबी की इस्त्री मैं
और भी उभर आती है पीली बूढा करती मैल

अलमारियों में पहुँच सभी कपडे बन जाते है रिश्ते
और बेबसी की बातो के किस्से चलने लगते है

सिखा दो

Posted in Uncategorized on मई 15, 2011 by paawas

तुमने
टाँके थे बटन मुझ बेचारे के कुर्ते पर
रख दिया था कुरता मैंने तुम्हारी बातों की तहों में

आज उसे पहना तो
नागफनी के विषैले दंश
लहू लूहान कर रहे हैं मेरे वक्ष को

विषाक्त सा मन मेरा तड़प रहा है

क्या बाकी कपड़ों में भी उग आये होंगे कांटे नागफनी के
आ जाएँ जो हुनर मुझे भी बटनों को ज़हरीले नागफनी बनाने का
तो जी पाऊंगा इस दुनिया में सफल हों
सिखा दो ना ये हुनर मुझे भी