अप्रैल, 2010 के लिए पुरालेख

Sandese

Posted in Uncategorized on अप्रैल 25, 2010 by paawas

हलकी हवाएं,
भारी संदेसे
कैसे उठाएं

रोती हैं आँखें
रो लेने दो,

पीड़ा के मोती
पिरो लेने दो

बाहों के घेरों की
माला भी हो,
बिरहा की रातों की
ज्वाला भी हो,

श्वासों की खुशबू,
मचलती हुई,
हलकी हवाओं को छलती हुई,
भीगी घटाओं में धो जाएं।

और,
भीगी हवाएं
हलके संदेसे
पल में ले जाएं।
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खुमार तेरी बातों का
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कोई बतलाये मुझे …

Posted in Uncategorized on अप्रैल 1, 2010 by paawas

देखो एह्सास में लिपटे हुए इन ख्वाबों को,
और यादे हैं की बस भीड़ बनी बिखरी हैं
तैरती तैरती सी रहती हैं फ्रेमो में जड़ी
चेहरे यादों का लिए शोर करें ख्वाब कभी,
या कभी ख्वाब के चेहरे लिए यादें आएँ।
ख्वाब यादों से हैं, या यादें हैं ख्वाबों से बुनी।
कोई बतलाए मुझे कोई तो बतलाए मुझे……।
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अंतर के स्वर
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