सितम्बर, 2009 के लिए पुरालेख

तस्वीरें

Posted in Uncategorized on सितम्बर 30, 2009 by paawas


हाथ में झोला लिए निकला है
काम पे अपने भोर का सूरज
लाल से पीला हुआ जाता है।

रौशनी अपनी हार कर सारी,
शाम को लौटेगा थका हारा ,
और खामोश सो रहेगा कहीं।

होके खामोश डराते हैं हमें,
लंबे लंबे उनींदे गलियारे,
बंद गरदों से सने ये कमरे।

गूँज बातों की अब नहीं है कहीं,
कमरे खंड हर से हुए जाते हैं,
स्कूल कालेज सभी हैं बंद पड़े।

ऊंघते से ये आलसी ढीले,
रेंगती माल के बदरंग हुए,
ईंट के रंग के लचर डिब्बे।

सहमा सहमा सहमा सब कुछ

Posted in Uncategorized on सितम्बर 16, 2009 by paawas

सहमी सहमी सी फिजाएं हैं यहाँ,
सहमी सहमी हवाएं बहती हैं,
सहमी सहमी सी इक सड़क के करीब,
सहमी सहमी सी खिड़कियों वाला,
सहमा सहमा सा घर तुम्हारा है।

सहमे सहमे से बस उसी घर में,
सहमा सहमा तुम्हारा चेहरा है,
जिस पे सहमी सी गहरी आँखें हैं।

सहमी सहमी सी उनकी पलकों में,
सहमी सहमी सी एक उम्मीद भरा
सहमा मासूम मेरा सपना है।

बाद सहमी सी कई सदियों के
मेरा मासूम सहमा सपना वो,
अब महज़ एक ही बरस का है।

सहमा सहमा सा बीतता ये बरस
सहमे मासूम मेरे सपने को,
सौंप देगा नए बरस को जब।

कैसे रखेगा मेरे सपने को,
एक अनजान सा बरस ये नया,
मेरे मासूम नन्हे सपने को,

सोचकर कर डर सा मुझको लगता है।

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बातें जो कही नहीं
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आओ लौटा दें

Posted in Uncategorized on सितम्बर 15, 2009 by paawas

आओ
लौटा दें पुरानी चिट्ठियों को,
वो अधूरे ख्वाब जो चुभने लगें हैं-
और वो बातें जो सूखी पत्तियों सी
सड़ रहीं हैं मन के सूने आंगनों में।

लम्ज़ ठंडी उँगलियों के जो नहीं हटते परे हैं।
आँधियों के साथ उड़ती हसरतें वो,
और टूटे इन्त्जारों की कहानी।

आओ
लौटा के सभी कुछ,
बन रहे खंडहर,
रहे खामोश, जिंदा,

आओ ओढें आँधियों को
जो कई सदियों में हमको,
कर चुकेंगी धूल कंकर पत्थरों सा।

वक्त की परछाइयों से हो रहेंगे तब सभी हम।


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बातें जो कही नहीं
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साथ तेरे

Posted in Uncategorized on सितम्बर 8, 2009 by paawas

रात को सोये सोये गर कोई,
घेर ले डर कभी तुम्हें आकर,
गहरे बादल घिरे हों चारों तरफ़,
तेज़ हो शोर हवाओं का अगर
डूबा डूबा सा दिल उदास लगे,

नाम होटों पे रख के तब मेरा,
करना महसूस अपने पास मुझे,
मन की परतों में मैं कहीं भीतर,
एक आवाज़ सा मिलूंगा तुझे

और पल भर में ही घिरा हर सू,
ये उदासी ये डर अकेलापण
उड़ रहेगा बस धुंआ होकर।

मेरे हम दम मैं साथ हूँ तेरे।

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बातें जो कहीं नहीं
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उन दिनों की बातें

Posted in Uncategorized on सितम्बर 5, 2009 by paawas



आओ तुम मेरे ह्रदय के पास आओ
और बन जाओ मेरे गीतों की धड़कन
तुम मेरे रीते पलों में रंग भर दो
विश्व की कोई अनोखी कल्पना बन
मेघ राशि सी बनो तुम सहज उज्जवल
और आभा युक्त पूरब की उषा सी
अपनी अलकों को मेरे सब ओर फैला
आओ रच दो कोई कोमल एक बंधन।
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गीत कभी जो तुमने गाये
खोये धीमे शांत स्वरों में
उन्हें चुरा ले दूर गए थे
कहीं पवन के नटखट झोंके
आज पवन के वे ही झोंके
उन्हें उड़ा ले वापस आए
अपने गीतों को सुनकर के
लगा लौट आए बीते दिन।
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स्कूली दिनों के ये शब्द पुराने फटे/ उधडे परसों की जेबों में से झाँक रहे थे, सोचा आप के साथ ये भी बाँट लूँ।

पोस्टर

Posted in Uncategorized on सितम्बर 2, 2009 by paawas

मार्च के ये पल
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है उनींदे से आलसी ढीले,
रेंगती माल के बदरंग हुए,
ईंट के रंग के लचर डिब्बे।

जैसे बेजान होके बैठी हो,
पोंछती पल्लू से पसीने को,
चिडचिडी चीखती थकी सी हवा।

रात है गर्म और अँधेरा है,
नींद आंखों से लौट जाती है,
बिजली वालों की आज छुट्टी है।



तुम्हारे दिन पर

Posted in Uncategorized on सितम्बर 1, 2009 by paawas



युग पुरूष बनना तुम्हें है,
और इसके वास्ते
बीती सदियों की सभी
तुम यातनाओं को सहो।

तुम तो शिक्षक हो,
तुम्हें तो हर हुनर मालूम है,
थाम नन्हीं उँगलियों को,
रूह से सपने बुनो।

आसमानों में उडे हो
धूप में निखरे हो तुम
रौशनी बन कर कोई
तुम आत्माओं में रहो।


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शिक्षक दिवस पर
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